एक दिन मैं काम करते बालक को देख रहा था
काम में तल्लीन
एकाग्रचित जैसे किसी मिशन में
लगा हो
उम्र कम ही प्रतीत हो रही थी
आखिरकार मैंने पूछ ही
लिया उसकी उम्र
16 साल मुस्कुराते हुए उसने कहा
पढ़ाई नही की
सहसा मैंने पूछ लिया
आठ तक
वो तपाक से बोला
आगे क्यों नही पढ़ा
उसने कहा कि पैसा कहा से लाते
पढ़ाई फ्री होती है , मैंने कहा
पढ़ाई से नौकरी कहाँ मिलती है
पैसा तो चाहिए ही जीवन के लिए
पढ़ाई से नौकरी
पढ़ाई से ज्ञान व जानकारी
ये सारे तर्क जैसे छू मंतर हो गए
लेकिन निगाहे उस पर टिकी रही
16 साल का बच्चा
घरों में कितने लालन पालन से रहता है
उसके पीछे परिवार रहता है
उसके खाने पीने और कपड़े की फरमाइश खत्म ही नही होती
यूनिफार्म पहन वो कितना सुंदर दिखता है
लेकिन निगाहे पुनः उस लड़के की ओर चली गई
फिर अवसर मिलते ही
पूछ लिया कि भाई बहन है
वो पढ़ते है
वो उनको पढ़ाना चाहता है
अद्भुत बच्चा बच्चे को पढ़ाना चाहता है
बात होती है
हर रोज करता हूँ
वीडियो कॉल भी होती है
उस वक्त मुझे मोबाइल
का महत्व समझ आया
उसके लिए मोबाइल
घर पर परिवार से बात करने के लिए था
लेकिन फिर मैं सोचने लगा कि हमेशा इसी काम में रहेगा
मिस्त्री से अगर बन सका तो राज मिस्त्री
इस उम्र में इतनी मेहनत और अपने काम में बहुत कुछ सीखने का जज्बा मैं देखता रहा
संगीत, कला, हुनर ,संस्कार की नींव बचपन में ही रखी जाती है...
फिर घर के बच्चें दिखने लगे
उनका लालन पालन
तभी स्मरण आ गया आदि शंकराचार्य, संत ज्ञानेश्वर, बाबा अलाउद्दीन खान ऐसे कितने नाम जहन में तैरने लगे जो बचपन से ही अलग अलग राह पकड़ निकल गए असीम दुनियां में,
हालांकि कभी इनका भी बचपन होगा,जब किसी ने मेरी तरह इनको देखा होगा, और उनके बारें में सोचा ही होगा
लेकिन आदमी परिणाम से ही देखता और किसी को तोलता है
यात्रा कौन देख पाता है
केवल यात्री ही समझ सकते है
यात्रा का ठंडा गरम ऊंच नीच,....
लेकिन फिर सामान्य अवस्था की ओर ध्यान लौट गया
ये व्यवस्था , देश ,कानून से परे की बात है
ये बच्चा काम सीखने और करने में तल्लीन था
ऐसे कितने बच्चें होंगे जो बहकाकर ,उठा कर कही गुम हो जाते होंगे
अपराध, नशा, और न जाने किन किन गलत से बहुत गलत ग़ैरमानूनी कामों में लगा दिए जाते है
उनके अंगभग कर भीख तक के लिए दरिंदे लगे है
कौन होते है,ये दरिंदे संभव है ,वो भी कम उम्र में हुए हो गायब या समाज की इस घिनौनी दुनियां में फंसे हुए गंदी नाली के कीड़ों की तरह जीवन जी रहें हो
भाव से रहित , इनके भीतर नफ़रत बहुत गहरी पैठ जाती है , उनके विवेक को हर लेती है
विवेक पर अंधकार छाया तो ज्ञान व समझदारी कही दुबक जाते है
विवेकहीन व्यक्ति और ताकत सर्वनाश की ओर ही जा सकता है,ये तय है...
लेकिन फिर मेरा ध्यान इस बच्चें पर केंद्रित हो गया
यकायक उसने अंकल जी चाय ले लो कहा
तो मैं फिर पहले की अवस्था में उस बच्चें की मुस्कराहट को देख कुछ क्षण पूर्व समाज की घिनौनी दुनियां से बाहर आया
समाज, शिक्षा, रोजगार, दर्शन, कला, साहित्य, राजनीति, चुनाव, कोर्ट, संसद धर्म,जाति ,क्षेत्र , दुनियां, युद्ध, परमाणु ताकत , व्यापार, शेयर मार्केट, शराब व नशा माफिया, कच्ची शराब के पनपते तस्कर की बहस में उलझा समाज और मेरे सामने काम करता बच्चा ,उसके चेहरे पर सच्चाई, उसकी हंसी को देखता सोचता चाय की चुस्की लेने लगा, तभी दूर पहाड़ पर बादलों ने अपना वितान तान लिया
प्रकृति शाश्वत और सत्य है
इसके नज़ारे अनंत और असीम है
यकायक वर्षा की बूंदों ने तंद्रा तोड़ी चाय का गिलास लिए भीतर जा कर बूंदों को निहारता हुआ
उस प्रकृति के आनंद को लेने लगा जो सत्य और अनादि है
हम तो केवल यात्री है
सच में यात्री जो यकायक लोप हो जाएंगे जड़ चेतन से ये ही अटल सत्य है और सतत ...
रमेश मुमुक्षु
अध्यक्ष, हिमाल
9810610400
8.8.2022
4.47
रमिया काफल
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