(स्थापना दिवस और एच आई वी एड्स )
9 नवंबर 2000 आज ही के दिन मैंने डिग्री कॉलेज बेरीनाग में HIV/एड्स के बारे में लेक्चर दिया था। उस समय इस बीमारी के बारे में लोगों की जानकारी कम थी और लोग बात तक करने से कतराते थे। आज 2017 में भी हालात बहुत नही बदले।अभी हाल फिलहाल में कुछ बच्चों की सूचना मुझे मिली जिनको को अलग रखा गया है। ये केवल उत्तराखंड की नही बल्कि दिल्ली में भी ऐसा देखने और सुनने को मिल जाता है।
दिल्ली में एक पीढ़ित को आपरेशन करवाना था। बड़ा ताज्जुब हुआ , लगभग सभी अस्पताल वालों ने कुछ बहाना बनाकर आपरेशन से इनकार किया।
लेकिन उत्तराखंड में अभी लोग कतराते जरूर है। लेकिन नुकसान नही पहुंचाते हैं। असल में इसका कारण जानकारी न होना भी है। असल में जानकारी और मरीज़ की सेवा संबंधी सावधानी, जी किसी भी बीमारी के साथ होता है , को ध्यान में रखकर आगे आना चाहिए।
लेकिन मेरी अपील है कि अगर कोई बीमार और प्रभावित हो तो उसके साथ मिलजुल कर रहे। उसके इलाज और देखभाल से पीछे न हटे।
पिछले तीन वर्षों के दौरान सभी केअर होम अब काम नही कर रहे है। पहले कोई बीमार मिलता था , तो उसको मैं कहीं कहीं भेज दिया करता था।। अब दिक्कत हो चली है। लगता है स्वयं ही कोई केअर होम खोलना पड़ सकता है।
बाकी बहुत कुछ वैसा का वैसा ही है, ये लोग जानते ही है। जब कोई अनाथ बच्चे वो भी hiv प्रभावित हो की सूचना मिल जाये , तो कुछ ठोस करना ही होगा। 17 साल हो गए राज्य को बने इस क्षेत्र में प्रगति नाम मात्र ही है। इसके अतिरिक्त अन्य बीमारी की भी यही स्थिति है। अभी कैंसर के मरीज और शुगर की संख्या बढ़ने लगी है।
सब लोग इस बारे में सजग रहे और जानकारी प्राप्त कर पीढ़ित को प्रेम प्रदान करें ।
रमेश मुमुक्षु
9810610400
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Thursday, 9 November 2017
स्थापना दिवस और एच आई वी एड्स
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