दीवाली की रात अभी पुलिस बीट वालों के हूटर की हुआ हुआ अभी बजी बज रही थी।
इस बार पूरा विश्व कोरोना के कारण अप्रत्याशित त्रासदी से जूझ रहा है। दिल्ली में वायु प्रदूषण और कोरोना के केस यकायक बढ़ने के कारण किसी भी प्रकार के पटाखे इस बार पूर्णतः वर्जित किये गए है।लेकिन अभी भी फाटक ,धाएँ धाएँ ,सुर्र सुनाई दे रहे है। पुलिस के हूटर आने पर क्षणिक रूक जाते है। बात ये नही कि पटाखे जलाना सही है,या गलत ,लेकिन जब दुनियां में कोरोना से बहुत बड़ी जनसंख्या ग्रसित है और ऐसा अध्ययन से मालूम चला है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण और उसके साथ पटाखे के धुएं से कोरोना पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
इस कारण सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आह्वान किया गया कि किसी भी प्रकार के पटाखे न जलाए ताकि वायु प्रदूषण न बढ़ने पाए।
लेकिन अभी मैं 9.15 रात में घर पर ये लिखते हुए , पुलिस।का हूटर और पटाखे की आवाज सुन रहा हूँ हालांकि पिछले वर्षों से बहुत कम है। लेकिन हम लोग क्यों नही पूरी तरह ऐसी बातों को नही मानते है।
सबके अपने अपने तर्क होते है। लेकिन अभी भी कितने लोग होंगे ,जिनको स्वास संबंधी रोग होंगे। मैं खुद भी अस्थमा से पीड़ित हूँ, बचपन से , इसलिए इसका अहसास मुझे है। 80 के दशक में कितनी बार दीपावली के कारण दमें के अटेक भी हुए। लेकिन उस दौर में वायु प्रदूषण इतना अधिक नही था।हालंकि 1982 एशियाड के बाद चीज़े तेजी से बदलने लगी,जो आज भी जारी है। कितने बार लगता है कि हम कानून, परम्परा, अध्यात्म सहित दुसरों की तकलीफ को भी कम ही महसूस करते है। बहुत से लोग ये कहते है कि क्यों न पटाखे जलाये। इसकी उसकी कहते है और जम के जलाते हुए ,गौरवान्वित अनुभव करते है। अच्छा हो कि देश के आह्वानों को सुने और देश हित और मानवता के हित में एक दूसरें की परवाह करने की आदत डालें। अभी रात के 10.44 बज रहे है लेकिन अभी धड़ाम धड़ाम की आवाज बीच बीच में आ रही है। कुछ देर पहले लड़ी की आवाज आ रही है।
लॉक डाउन की तरह ये पाठखे बजाने वाले पुलिस के आते ही चुप हो जाते है। कुछ कहते है,परम्परा है, कुछ कहेंगे कि बच्चों के लिए करना होता है। काश हम लोग कानून और इस तरह के आह्वान पूरी तरह मानना सीख ले तो देश के संविधान और कानून को मानने की आदत ही पड़ जाए। देखते है ,कब ये शुरू होगा। दीपावली की सभी को शुभकामना।
रमेश मुमुक्षु
अध्यक्ष ,हिमाल
9810610400
14.11.2020
11.12 PM
No comments:
Post a Comment