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Friday, 11 December 2020

शीर्षक : कोई काला धन छुपाएगा

शीर्षक : कोई काला धन छुपाएगा -
कोई काला धन छुपाएगा 
कोई काला धन बनाएगा 
वो कहाँ जाएँ 
जिनके पास ना काला धन 
न सफ़ेद धन 
 उनके पास है 
प्रेम , आपसदारी 
तूफानों से जूझने का जज्बा  
और 
सत्य को स्थापित करने की जिद 
दोस्तों  के दोस्त  
अभाव और फाँकों 
के 
संगी साथी 
मतवाले 
अपनी धुन में चलने वाले 
न लेफ्ट के न राइट के 
 मात्र 
मानवता के 
निपट अकेले 
हमसफर 
प्रेम के प्यासे 
मानवता  के दोस्त 
कौन सा एटीएम उनके भीतर के 
 कोलाहल
को समझ पाएगा 
कौन सा पासवर्ड 
होगा 
जो दोस्तों पर न्योछावर कर देगा 
रंगीन नोट 
प्रेम से भरपूर 
हवा में होगा अर्थशास्त्र  
हवा तो हवा ही है 
किधर बह जाये 
मानव की 
संवेदना 
को भी 
सुना है 
क़ैद कर लिया जाएगा 
मशीनों में 
ताकि उनकी  बगावती
आवाज़ 
किसी पासवर्ड और पिन नंबर 
 से जूझती रहे 
निकलने को क़ैद 
से 
और खोजती रहे 
प्रेम
 और
 दबा दी गई 
 वो चिंगारी 
जो एक फूँक 
के लिए तरसेगी 
एक दिन 
क्रांति की ज्वाला 
भड़काने 
के लिए ....
रमेश मुमुक्षु
2016 नोट बंदी के दिनों कैफ़े द आर्ट मरीना आर्केड कनॉट प्लेस में एकल पेंटिंग प्रदर्शनी के दौरान ए टी एम की लंबी लाइनों के दौरान लिखी।

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