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Thursday, 1 March 2018

भारत में पर्यावरण की बदहाली

(भारत में  पर्यावरण की बदहाली )
भारत विश्व पर्यावरण परफॉरमेंस में 180 राष्ट्रों में  177 वे स्थान पर लुढ़का , केवल बंगला देश और दो छोटे देश ही भारत से नीचे है। पाकिस्तान , नेपाल और श्रीलंका भी भारत से ऊपर के पायदान पर टिके है। चीन तो बहुत ही ऊपर है।
इतना नीचे होने की जिम्मेदारी केवल किसी सरकार की अकेली नही हो सकती। इसके लिए पूरा देश ही जिम्मेदार है ।
भारत महान देश है, इसका इतिहास गौरवपूर्ण था, भारत विश्व गुरु था और रहेगा , गंगा की एक बूंद मरते हुए व्यक्ति का तर्पण कर देती है, यमुना किनारे कृष्ण और गोपियों के रास भारत के इतिहास गौरव है, गीता समस्त ज्ञान का  एक मात्र अंतिम ग्रन्थ है, वेदों में विश्व का सम्पूर्ण ज्ञान निहित है। शांति मंत्र पढ़ते पढ़ते युग बीत गए । भारत ने ही पूरे विश्व को ज्ञान दिया ।
भारत में गंदगी को देख घृणा होती है। गंदा उठाने वाले भी तय कर दिए। सफाई की पराकाष्ठा वाले विश्वगुरु देश में आदमी की परछाई से भी हम अस्पृश्य हो जाते थे । छुआछूत ये ऊंचा वो नीचा हमारी विशेषता है।
एक दूसरे पर दोषारोपण करना हमारा राष्ट्रीय चरित्र है। पर निंदा और अपने मुंह मिट्ठू बनने में हम माहिर है। कोई 70 साल का , कोई 1000 साल का , कोई जाति का , कोई धर्म का  , कोई अंग्रेज़ का, सबसे बड़ा पश्चिमी सभ्यता का । अपने को ऐसा दिखाना की सब कुछ हमसे निकला है। इन सब पर मैं टिप्पणी नही करूँगा।
इन सब का कुल जोड़ है कि भारत के पर्यावरण की बदहाली दुनिया में 180 देशों की सूची में 177 नंबर पर है। शुक्र है बांग्लादेश हम से नीचे है। पाकिस्तान  और नेपाल भी  हम से ऊपर है। चीन तो बहुत ही ऊपर है।
ये सरकारों का नही ,क्योंकि सरकार हमारी होती है और हमसे होती है। हम लोग कानून तोड़ने के मास्टर है। कब्जा करना, अवैध निर्माण, अवैध माइनिंग, कहीं भी आग लगा देते है। उद्योग धंधों में निकलने वाले कचरे का कोई पुख्ता इंतजाम हमने नही किया। घुस और ले देकर कर लो हमारा राष्ट्रीय चरित्र है। इसमें पूरा देश जिम्मेदार होता है। ईमानदार की कद्र नही। आज ध्यान से देखने पर कड़वी सच्चाई सामने आती है कि समाज में ईमानदार लोगों की हालत ठीक नही। उनको आदर्श के रूप में नही देखा जाता। ये बात अपने आस पास ध्यान से देखो। जो लोग ले दे कर की संस्कृति पर विश्वास करते है ,  उनकी सेटिंग ऐसी होती है कि उनको पूरा सिस्टम सलाम करता है। दिल से न भी करे, लेकिन दिखावे में सही। मैं नही कहता कि अपने ईमानदारी के जज्बे को बदलो , क्योंकि ईमानदारी जज्बा है जो सिर उठा कर जीना सिखाता है।  लेकिन कानून तोड़ने वाले पूरी व्यवस्था को प्रभावित कर देते है। इसका प्रभाव बुरा होता है। हम केवल मौके का लाभ उठाते है। कानून को ले दे कर चलाने में विश्वास करते है तो सब कुछ कभी ठीक नही चल सकता। कहीं मकान बना लो , कैसा भी निर्माण कर लो। निकासी हो ,या न हो , बस कर लो देख लेंगे। ये हम सबका स्वभाव बन गया । चूंकि एक बड़ी जनसंख्या ऐसा सोचती और करती है ,तो व्यवस्था कहाँ से पनप सकती है।
इन सब के कारण हम दुनियां में इतने नीचे का पायदान पर है। अभी भी कोई अगर छाती पीटता है तो बहस का मुद्दा नही , यमुना किनारे खड़े हो कर यमुना को निहार ले । ऋषिकेश के वानप्रस्थ आश्रम जो राम झूला में स्थित है, उंसके बगल में एक नाला बहता है, जो पवित्र नदी ,जो कैलाश की जटाओं से निकलती है, मिल जाता है। कुछ दूर ही शाम को आरती भी होती है।
बस ऐसा ही सब और है। दिल्ली को हो ले , दिल्ली के पास अपना कोई पानी नही है। लेकिन निर्माण पर जोर है। दिल्ली में ऊर्जा की खपत पड़ती जा रही है। इसका दुष्प्रभाव हिमालय और उसकी नदियों पर ही पड़ेगा।
अभी वर्षों से बर्फ पानी कम होता जा रहा हैं , इस वर्ष तो ऊँचाई वाले क्षेत्र बिना बर्फ रह गए। लेकिन कोई चर्चा नही। जिनके पास  मोटा जुगाड़ वो तो हजारों रुपए देकर पानी भी पी लेते है। फ़ोन किया पानी हाज़िर। ये लोग शुद्ध खाना भी लेते है।
लेकिन एक आम आदमी खतरनाक केमिकल का सेवन कर रहा है। मिलावट भी हमारा राष्ट्रीय चरित्र बनाता आया है।
नेता और बुद्धिजीवी  उल्टे सीधे आंकड़े देकर कुछ भी कहते है। लोग जिस बात से खुश वो ही कहेंगे।
नदी साफ नदी से ही  नही होती अपितु पूरी कचरा निस्तारण की पुख्ता व्यवस्था से ही होती । अपने आस पास नज़र घुमा कर स्वयं ही अवलोकन कर ले ,हकीकत सामने आ जायेगी। देश की नदी की सफाई उस देश की सच्चाई स्वयं बोलती है। दिल्ली में यमुना एक गंदे नाले के रूप में बह रही है। साफ हवा केवल ईमानदार व्यवस्था से ही संभव है। सतत और सबको एक सूत में पिरो कर ही विकास आगे बढ़ेगा तो ही हमारा स्थान ऊंचा होगा , नही तो बांग्लादेश से भी नीचे लुढक सकते है, वो दिन दूर नही । देश  भाषण , दुष्प्रचार , भ्रामक आंकड़ों, दोषारोपण से नही साफ होगा। इस मिशन में कानून की स्थापना से शुरुवात करनी है। अगर कानून कब्जे को गैरकानूनी कहता है , तो इसका पालन होना ही चाहिए। ये एक बिंदु है , इसके अतिरिक्त कितनी चीज़े है , जिनके कारण देश गंदगी और वायु प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित है।
उपरोक्त बातों में कोई गलत नही है , ये सब सच्ची बात है। बस इनकी और फोकस करने मात्र से शुरुवात हो सकेगी। प्राकृतिक संसाधन संरक्षित रहे , केवल इस मिशन से ही देश आगे बढ़ सकता है। नदी और सभी स्रोत साफ और स्वच्छ रहे , ये राष्टीय मिशन होना चाहिए। जब कोई हमारा बड़बोलापन सुनकर यमुना और अन्य नदियों को देखता होगा , तो कथनी और करनी सामने आ जाती है। इस गैप को ही दूर करने का सबसे पहले मिशन लेकर आगे बढ़ना ही।
अगर देश को साफ रखना है तो।
रमेश मुमुक्षु
अध्यक्ष, हिमाल
9810610400

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